हमारे Homeopathy चिकित्सा अनुभव पर निखरे मोती – Viral News

Homeopathy एक प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति है जिसे सम्पूर्णतः प्राकृतिक उपचार प्रक्रिया माना जाता है। इस चिकित्सा विधि में छोटी मात्राओं में विषयकों को विशेषतः तैयार किया गया और इन्हें विशिष्ट अनुदेशों द्वारा व्यक्तिगत रूप से दिया जाता है। होम्योपैथी में एक मुख्य सिद्धांत है कि यदि एक पदार्थ विशेष मात्रा में देय लाभ देता है, तो उसी पदार्थ का छोटी मात्रा में उपयोग करने से वह विशेषता उपचार में उपयुक्त होती है।

होम्योपैथी के लाभ:

  1. प्राकृतिक और सुरक्षित: होम्योपैथी चिकित्सा में उपयोग होने वाले उपाय प्राकृतिक और सुरक्षित होते हैं, जिससे किसी भी प्रकार के दुष्प्रभाव का सामना नहीं करना पड़ता है।
  2. व्यक्तिगत उपचार: होम्योपैथी में उपचार का चयन व्यक्तिगत रूप से किया जाता है, जिससे रोगी के लक्षणों और प्रकृति के अनुसार उपाय तैयार किए जाते हैं।
  3. संपूर्ण उपचार: होम्योपैथी चिकित्सा के सिद्धांत के अनुसार, रोग का संपूर्ण उपचार केवल शारीरिक लक्षणों के साथ ही मानसिक और भावनात्मक लक्षणों का भी सम्मान करता है।
  4. अन्य चिकित्सा विधियों के साथ संगति: होम्योपैथी चिकित्सा का उपयोग अन्य चिकित्सा विधियों के साथ संगत रूप से किया जा सकता है और इसका उपयोग अन्य चिकित्सा उपचारों की सार्वजनिक प्रभावशीलता को बढ़ा सकता है।

कृपया ध्यान दें कि इस जानकारी को देखते हुए व्यक्तिगत चिकित्सा नहीं की जानी चाहिए, और होम्योपैथी उपचार के लिए सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त होम्योपैथिक वैद्य से परामर्श करना सुरक्षित होता है।

१. एनोटेनम एक शक्तिशाली Homeopathy औषधि है तथा इसे जल्दी-जल्दी नहीं दोहराना चाहिये। यह कई हफ्तों तक क्रियाशील रहती है।

२. एसेटिक एसिड फेफड़ों के क्षय रोग में बहुत खतरनाक औषधि है। यह रक्तस्त्राव उत्पन्न कर सकती है

३. हृदय की हायपरट्राफी के अतिविकसित रोग प्रकरणों में एकोनाइट का उपयोग न करें।

४. यदि प्रसवोत्तर स्त्राव का दमन हो गया तो एकोनाइट का उपयोग न करें।

5. रसटाक्स तथा एपिस का आपसी विद्वेषी संबंध के अतः इन औषधियों को एक दूसरे के पहिले अथवा बाद में प्रयोग न करें। ५.

६. गर्भ के पहिले तीन माह तक एपिस का उपयोग बहुत सावधानी के साथ करें यह औषधि निम्म शक्ति में गर्भपात उत्पन्न कर सकती है।

7. अर्निका में दुखन (Soreness) के लक्षण से भ्रमित न हों क्योंकि छितरे हुऐ घावों में स्नायुओं के खतरे से महत्व बहुत कम है हमें हायपेरिकम के बारे में पहले विचार करना चाहिये।

8. अर्निका का उपयोग एक अनाड़ी व्यक्ति की तरह कभी नहीं करना चाहिये क्योंकि इसका अंधाधुन्ध उपयोग विसर्प (Erysipilas) उत्पन्न कर सकता है।

९. अर्निका द्वारा उत्पन्न विसर्प बहुधा केम्फर लोशन के प्रयोग से तथा उसी समय औषधि के आन्तरिक सेवन से ठीक किया जा सकता है।

१०. मै आर्सेनिक एल्बम के बारे में एक सावधानी बताना चाहता हूँ यह कि यह औषधि रोगों की प्रारम्भिक अवस्था में निर्देशित नहीं है। यदि आप इस औषधि का प्रयोग प्रारम्भ में ही कर देते हैं तो प्रकरण में यह औषधि उस अवस्था को उत्पन्न कर सकती है जिसे आप दूर करना चाहते है। इसके उपयोग से पूर्व आप पहले इसकी मानसिक अवस्था को सुनिश्चित कर ले अन्यथा आप लाभ के स्थान पर हानि ही पहुंचायेगे।

११. बेसीलीनम का उपयोग ३०वी शक्ति से कम कभी न करें तथा बार- बार भी प्रयोग न करें सप्ताह मे एक मात्रा अपेक्षित प्रतिक्रिया उत्पन्न करने के लिये पर्याप्त है। इसकी क्रिया तुरन्त होकर अच्छे परिणाम प्राप्त होते है अन्यथा इसके बार-बार देने से कोई लाभ नहीं है।

12. काले पानी के दर्द में बेलाडोना का उपयोग बहुत सावधानी से करना चाहिये क्योंकि काले पानी (Glaucoma) का दर्द बेलाडोना से बहुत साम्यता रखता है। इस अवस्था के लिये इस औषधि की निम्न शक्ति कभी भी उपयोग में न लावे तथा यदि आप ३०वी अथवा २००वी शक्ति का प्रयोग कर रहे है तो रोग प्रकरण का ठीक से अवलोकन करते रहे।

१३. उन्माद के रोगियों में बेलाडोना का उपयोग निम्न शक्ति में निरर्थक है उच्च शक्तियां शीघ्र एवं अच्छी असरकारक होती है।

१४. बेलिस पे औषधि का उपयोग सोने के पूर्व न करें क्योंकि यह अनिद्रा उत्पन्न कर सकती है

१५. ब्रायोनिया औषधि का सेवन करने के दौरान नीबू के रस का उपयोग न करें क्योंकि यह अम्ल तथा नीबू की प्रतिरोधी है।
१६. वृद्धावस्था में केलकेरिया कार्ब औषधि का उपयोग अधिक
दिनों तक बार बार न करें।

१७. मेरे विचारानुसार केलकेरिया कार्ब का उपयोग नाइट्रिक एसिड अथवा सल्फर के पूर्व न करे अन्यथा मनवांछित दुष्परिणाम हो सकते है।

१८. केलकेरिया फास की भारी मात्राएं अनुपयोगी एवं घातक होती है. अधिक उपयोग वृक्क शूल तथा पथरियाँ उत्पन्न कर सकती है. अधिक उम्र के व्यक्तियों में निम्न शक्ति की औषधि नही देना चाहिये।

19. जब रोगी को पसीना आ रहा हो तब केम्फर औषधि नही देना चाहिये। यह औषधि काफिया अथवा काली नाइट्रिक या केलेडुला के बाद दिये जाने पर असरहीन होती है ।
२०. जब रोगी को कास्टीकम औषधि दी जा रही हो तब काफीया का सेवन निषेध कर देना चाहिये क्योकि काफीया कास्टीकम के लक्षणों में तीव्रता ला सकती है।

२१. जो रोगी दर्दों को बहुत शान्तिपूर्वक एवं धैर्यपूर्वक सहन कर लेते है उन्हें कैमोमिला औषधि में लाभ की आशा नही करना चाहिये।

२२. आदतन रूप से काफी पीने वालों को काफिया औषधि न देकर कैमोमिला देना चाहिये ।

२३. मेरे चिकित्सा अनुभव के अनुसार एचिनेशिया Homeopathy औषधि एपेन्डिक्स पर क्रिया करती है तथा एपेन्डिसायटिस के प्रकरणों में दी गई है। किन्तु याद रखे यह औषधि पीब पैदा होने की प्रक्रिया को तेज करती है। इस क्रिया के दोरान एपेन्डिक्स फट भी सकता है।

२४. जेल्सीमियम में पेशाब कर रोगी हमेशा हल्का होता है कभी शकाओं को घटाता है।

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