Fever (बुखार) Symptoms: प्रकार एवं महत्वपूर्ण औषधियां – Viral News

व्यक्ति के शरीर का तापमान सामान्यतः 97° – 98.5°F होता है. शारीरिक तापमान में असामान्य वृद्धि को बुखार कहते हैं, बुखार के साथ चिन्ता, भय, दर्द, खांसी इत्यादि लक्षण हो सकते हैं.

Fever (बुखार) Symptoms: बुखार के प्रकार एवं उनकी महत्वपूर्ण औषधियां :-

1. सामान्य बुखार :- ज्वर जो चिन्ता, भय, तेज, धूप, अत्यधिक ठंड या वर्षा में भींगने से उत्पन्न हों तो उपयोगी दवाएं—एकोनाइट, नेट्रम म्यूर, पल्साटिला इत्यादि.
2. साविराम बुखार :- शारीरिक तापमान कभी सामान्य तो कभी बढ़कर अधिकतम सीमा तक पहुंच जाता है. रोगी को सामान्यतः तीन अवस्थाओं से गुजरना पड़ता है. शुरू में जाड़ा लगना, उसके बाद शारीरिक तापक्रम का बढ़ जाना और अन्त में पसीना आकर ज्वर का कम होना, इसके लिए उपयोगी दवाएं आर्सेनिक, चायना, जेल्सेमियम इत्यादि.
3. अविराम बुखार : शारीरिक तापमान सदैव ऊंचा बना रहता है, तापमान बढ़कर 105°F तक हो सकता है. उपयोगी दवाएं बेलाडोना, बैप्टिशिया, युपेटोरियम पर्फ – इत्यादि,
4. पुनरावर्तित बुखार (Relapsing fever) ज्वर एवं सामान्य तापमान की अवस्था एक के बाद एक आते हैं. प्रत्येक 5-7 दिनों तक रह सकता है। उपयोगी दवाएं – सोराइनम, सल्फर इत्यादि.
5. विषाक्त बुखार : दूषित रक्त जन्म ज्वर रोगी को अत्यधिक ठंड एवं उच्च तापमान की अवस्था से गुजरना पड़ता है,
उपयोगी दवाएं – एपिस मेल, इचिनेशिया, पाइरोजिनम इत्यादि.
6. प्रसूति बुखार – प्रसव के दौरान संक्रमण से ज्वर उत्पन्न होता है. रोगिणी में अत्यधिक ठंड के साथ उच्च तापमान की अवस्था पायी जाती है. उपयोगी दवाएं इचिनेशिया, पल्साटिला, पाइरोजिनम, रस – टॉक्स इत्यादि.
7. क्षय बुखार :- यह टी.बी. के रोगियों में मिलता है. तापमान में वृद्धि प्रायः शाम के समय होती है.
उपयोगी दवाएं – एकालिफा इण्डिका, फॉस्फोरस इत्यादि.
8. उच्चताप बुखार :- शारीरिक तापमान बढ़कर 103-105°F
तक पहुंच जाता है. उपयोगी दवाएं – बैटिशिया, युपेटोरियम पर्फ, पाइरोजिनम इत्यादि.

ज्वर के सामान्य कारण :-

1. रक्त का संक्रमण – मलेरिया, डेंगू, टायफायड इत्यादि.

2. चिन्ता, भय, क्रोध इत्यादि मानसिक कारण,

3. प्रसव के दौरान संक्रमण,

4. हृदय रोगों में, 5. गठिया एवं वात रोग में.

6. तेज धूप व अत्यधिक ठंड से,

7. मूत्रमार्ग के संक्रमण में.

8. दवाओं के दुष्प्रभाव से
9. यकृत एवं उदर रोगों में
10. कैंसर में,

बुखार में उपयोगी होमियोपैथिक औषधियां एवं महत्वपूर्ण लक्षण

1. एकोनाइट नैप :- चिन्ता, भय एवं अत्यधिक ठंड से उत्पन्न बुखार में विशेष लाभदायक.

2. आर्सेनिक एल्ब : सविराम तथा विषाक्त बुखार में विशेष उपयोगी रोगी अत्यधिक बेचैन तथा कमजोर होता है. रोगी को निश्चित मृत्यु का भय होता है, रोगी बार-बार पानी • मांगता है. रोगी की पेरशानी दोपहर एवं महत्वपूर्ण के बाद बढ़ जाती है,

3. बैटिशिया में कुचल :- टायफायड बुखार में विशेष लाभदायक है. शरीर जाने जैसा दर्द होता है, रोगी बिस्तर पर करवट बदलता रहता है. रोगी अत्यधिक कमजोर हो जाता है, बात करते-करते सो जाता है, बुखार 102-105°F तक होता है. रोगी के शरीर से अत्यधिक बदबू आती है.

4. ब्रायोनिया एल्ब :- ज्वर के साथ सूखी खांसी एवं सीने में दर्द हो तो विशेष लाभदायक है, रोगी बिस्तर में बिल्कूल शांत लेटे रहना चाहता है, रोगी का मुंह तथा गला सूख जाता है तथा ठंडे पानी की अत्यधिक प्यास होती है. थोड़ी-सी हरकत से रोगी की तकलीफ बढ़ जाती है,

5. चायना :- मलेरिया में विशेष लाभदायक, जाड़ा लगने से पूर्व एवं पसीने के समय रोगी को अत्यधिक प्यास लगती है. पसीने के बाद रोगी अत्यधिक कमजोर हो जाता है। मुंह का स्वाद कड़वा एवं पेट दर्द के लक्षण भी हो सकते हैं।

6. यूपेटोरियम पर्फ डेंगू बुखार में विशेष उपयोगी, जाड़ा लगने 1 से पूर्व अत्यधिक प्यास एवं तेज बदन दर्द मिलता है, रोगी को मृत्यु का भय रहता है. तेज ज्वर के साथ हड्डियों में ऐसा दर्द होता है मानों व टूट जायेगी.

7. जेल्सीमियम :- रोगी को अत्यधिक ठंड एवं कंपकपी महसूस होती है, वह बिस्तर पर लेटे रहना चाहता है. तेज सिर दर्द के साथ रोगी में प्यास बिल्कुल नहीं होती.

8. नक्स वोमिका :- रोगी को बुखार का पूर्वाभास हो जाता है.
तेज ज्वर में रोगी पूरे शरीर को ढ़क कर रखता है, खुला छोड़ने पर ठिठुरन होने लगती है.

9. पल्साटिला :- पाचन क्रिया में गड़बड़ी से उत्पन्न बुखार में विशेष उपयोगी. रोगी को प्यास नहीं लगती तथा खुली हवा में राहत महसूस करती है. बुखार में रोगी को कंपकपी होती हैं; परन्तु वह खुली हवा पसन्द करता है.

10. पाइरोजेनियम :- प्रसूति ज्वर में विशेष उपयोगी रोगी अत्यधिक बेचैन होता है, पूरे शरीर में कुचल जाने सा दर्द – होता है. नाड़ी की गति अत्यधिक तेज होती है तथा तापमान 105°-107° F तक होता है.

बुखार के साथ पाये जाने वाले अनेक लक्षण तथा उनकी महत्वपूर्ण औषधियां :-

1. बुखार के साथ सर्दी, खांसी और बजला होने पर एकोनाइट, – ब्रायोनिया, हीपर सल्फ, पल्सेटिला इत्यादि. 2. ज्वर के साथ तेज सिर दर्द होने पर बेलाडोना, जेल्सीमियम, – ग्लोनाइन नेट्रम म्यूर इत्यादि.

3. बुखार के साथ शरीर में तेज दर्द आर्निका, बेलाडोना, – बैटिशिया, युपेटोरियम, पाइरोजेनियम, रस टॉक्स इत्यादि.

4. बुखार के साथ उदर रोग
आर्सेनिक, एण्टिम कूड
इपिकाक, पल्साटिला इत्यादि.

5. मस्तिष्क रोगों के साथ बुखार – एपिस मेल, बेलाडोना, जेल्सीमियम, हेलिबोरस, नेट्रम सल्फ, वेरेट्रम विरीड इत्यादि.

6. चिन्ता, भय, एवं क्रोध से उत्पन्न बुखार – एकोनाइट, कैमोमिला, इग्नेशिया, नक्स वोमिका इत्यादि.
7. प्रसव के दौरान संक्रमण से उत्पन्न बुखार आर्निका मॉण्ट,पल्साटिला, पाइरोजेनियम, रस टॉक्स इत्यादि. 8. वर्षा में भींगने से उत्पन्न बुखार डल्कामारा, नेट्रम सल्फ, –

रस टॉक्स, इत्यादि,
9. नवजात तथा बच्चों के बुखार एकोनाइट, सिना, कैमोमिला –
इत्यादि.
10. बुखार में चेहरा लाल हो जाय बेलाडोना, ग्लोनाइन इत्यादि. –
11. तेज धूप के दुष्प्रभाव में बुखार स्पाइजेलिया इत्यादि. – ग्लोनाइन, नेट्रम म्यूर,

12. बुखार होने का पूर्वाभास हो तो इसकी दवा नक्स वोमिका ही है. व्यक्तिगत अनुभव :- होमियोपैथिक चिकित्सा पद्धति में दवा का चयन करते समय रोगी के असामान्य लक्षणों पर विशेष ध्यान देना चाहिए. इसी क्रम में अपने शासकीय होमियोपैथिक चिकित्सालय, पुतलीघर, भोपाल के दो रोगियों का जिक्र करना अतिआवश्यक जान पड़ता है, जो निम्नप्रकार हैं।

Case.No. 1.

IPD 243/2023- विगत 11/7/2023 को रोगियों के निरीक्षण के दौरान बेड नं0 3 पर राजेन्द, उम्र 14 वर्ष, बुखार से पीड़ित था. उसकी मां ने बताया कि दो दिनों से उसने कुछ भी नहीं खाया और प्यास भी नहीं लग रही है. रोगी का पूरा शरीर जल रहा था; परन्तु वह कम्बल ओढ़कर सोया था. केस रिकार्ड देखकर पता चला कि उसे बेलाडोना और जेल्सीमियम की दो-दो खुराक दी गयी थी, परन्तु कोई विशेष लाभ नहीं हुआ.

असामान्य लक्षण के आधार पर मैंने नक्स वोमिका 200 की दो खुराक आधे-आधे घंटे पर देने को कहा, रोगी के पुनः निरीक्षण पर पता चला कि बुखार तो 15 मिनट में ही उतर गया और रोगी बेड पर बैठा था. उसे नक्स वोमिका की एक खुराक रात में खाने के लिये देकर अगले दिन बुलाया. अगले दिन रोगी की मां ने बताया कि रात की खुराक के बाद एक बार उल्टी हुई और अब रोगी पूर्णतः स्वस्थ है.

Case. No-2

OPD- 17713/2023 आयशा, 32 वर्षीय महिला जो बहुमुत्रता के साथ पेशाब में हल्की जलन से पीड़ित थी. मैंने उसे इक्वजीटम 30 की दो खुराक आधे घंटे से दी. अगले दिन रोगी को पेशाब में आराम मिल गया; परन्तु उसे अत्यधिक ठंड के साथ तेज ज्वर हो गया था. उपरोक्त लक्षण के आधार पर मैंने उसे पाइरोजेनियम- 30 का चार खुराक दो दिन तक लेने को कहा. दवा के प्रभाव से रोगी को भी बुखार से राहत मिल गयी और पेशाब की हल्की जलन दूर हो गयी.

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