Homeopathy की ये मीठी गोलियां: होम्योपैथी चिकित्सा हर रोग पर भारी – Viral News

Homeopathy  हमारे जीवन की यह घटना करीब पैतीस या छत्तीस वर्ष पहले कीहै। तब मै ग्यारह बारह सालका था। पिछले तीन सालों से मै दाएँ पैर में नासूर से पीड़ित था। तीन साल में चार आपरेशनों के बावजूद रान की गिल्टियाँ पकती रहती और उनसे मवाद बहना जारी रहता। इस बीमारी ने मुझे चारपाई पर लिटा दिया।

स्कूल की छुट्टी हो गई। खेलना-कूदना क्या, रजौली (जिला-नवादा)में उन दिनों डॉक्टर खान साहेब का सर्जरी में बड़ा नाम था। छह महीने उनका इलाज चला। हार मानकर वे कहने लगे कि अगर यह नासुर उरू-मूल में न होकर और नीचे होता तो मैं टांग काटने की सलाह देता। खैर, उरू-मूल ने टाँग बचा दी, किंतु डाक्टर ने जीवन के बारेमेंना उम्मदी कर घर लौटा दिया।

सिरदला से रजौली के लिए बस स्टैंड पर बस बदलने के लिए उतरा। पिताजी साथ थे।कमर का घेरा डाले उरू मूल पर लम्बी पट्टी बँधी रहती थी ताकिमवाद को नीचे न टपकने दे। इसलिए बड़ी मुश्किल से लगड़ाकर हीचल पाता था। बस स्टैंड पर एक अपरिचित नौजवान सज्जन ने मुझे लगडाते देखकर पिताजी से पूछा कि यह लड़का लंगड़ा क्यों रहा है ? पिताजी ने अपरिचित सज्जन की हमदर्दी देखकर उन्हें सारी बात बतलाई ।

सज्जन बोले– “आपकी गाड़ी में अभी कई घंटे का वक्त है।यहाँ एबट क्वाटर्स (बीच बाजार के पास) है, जहाँ एक बड़े नामी होम्योपैथ रहते है। नाम है बनर्जी । स्थानीय राजकीय इंटर कालेज में गणित के प्रोफेसर है शौकिया होम्योपैथी करते है। उन्हें दिखा लीजिए, शायद लड़के की जिन्दगी बच जाए।” पिताजी मुझे प्रो. बनर्जी के पास ले गए। छरहरे बदन के, गेहुँआ रंग वाले डाक्टर बनर्जी की तस्वीर मेरी स्मृति में आज भी ताजा है।

अत्यन्त सौम्य तथा मृदुभाषी प्रोफेसर ने कोई उम्मीद तो नही दिखाई पर कोशिश करने का यकीन जरूर दिलाया। उन्होंने कहा कि जख्म पर कोई दवा न लगाएँ। नीम की पत्ती उबालकर उसके छने पानी से रोज जख्म को धोएँ और शुद्ध वैसलीन लगाकर पट्टी बाँध, खाने-पीनेमें तेल खटाई मसालों आदि का परहेज करें।

प्रो. बनर्जी जिन्हें मैं डाक्टर बनर्जी कहता था, कभी मुझे देख कर दवा देते, तो कभी पत्रों के आधार पर ही दवा तजवीज कर देते ।लेकिन उनका यह आग्रह रहता कि दवाएँ या तो बोरिकएंड टैफिलकम्पनी की बनी हो या सी. रिंगर एण्ड कम्पनी की। (ये नाम मै यादसे ही लिख रहा हूँ इसलिए इनमें स्मृति दोष भी हो सकता है) मुझे याद है कि हमें एक दवा तो सीधे जर्मनी से मंगवानी पडी थी क्योंकि ऊँची पोटेन्सी (शक्ति) की वह दवा भारत में होम्योपैथी की राजधानी कलकत्ते तक में सुलभ नहीं थी।

डॉ. बनर्जी का इलाज करीब दो साल चला। घाव का रिसना बन्द हो गया। थोड़े दिन बाद जख्म भर गया। दो वर्ष बाद में पूर्णतः स्वस्थ हो गया। इसका प्रमाण यह है कि स्वास्थ्य लाभ के बाद मैंने छात्र जीवन में हॉकी, फुटबाल तथा क्रिकेट जैसे तेज खेल खेले। तैराकी की। सामान्य नौजवान जवानी में जो कुछ करते है, वह सब मैंने किया। अब छियालीस की आयु रेखा पार करचुका हूँ और ये पंक्तियाँ लिख रहा हूँ।

Homeopathy  होम्योपैथी चिकित्सा के चमत्कार का मै जीता जागता उदाहरण हूँ। जर्मन डाक्टर सेम्युअल हैनीमेन और बंगाली डाक्टर बनर्जी के प्रति मेरी कृतज्ञता असीम है। यह बात मै आज तक नही भूला हूँ कि मुझे जीवन दान देने वाले बनर्जी मोशाय ने इलाज के बदले में एक पैसा तक लेना स्वीकार नहीं किया।

इतने निस्पृह व्यक्ति कम ही देखने में आते है। डाक्टर बनर्जी कुशल होम्योपैथी होने के साथ ही ऊँचे दर्जे के इन्सान थे। यह संयोग भी कम दुर्लभ नहीं है। इसी संयोग में होम्योपैथी अपने उच्चतम शिखर को स्पर्श करती है, गलत हो या सही, पर यह मेरा विश्वास है।

होम्योपैथी, एक प्राचीन और प्रमुख चिकित्सा पद्धति, जिसे समझा जाता है कि ‘समान को समान से इलाज’ करना चाहिए, भारतीय समाज में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है। होम्योपैथी चिकित्सा का उत्पत्ति 18वीं सदी में जर्मनी से हुआ था और उसके संस्थापक हॉमियोपैथी के आदिकर्ता समुएल हैनेमनन थे।

होम्योपैथी में रोगों का इलाज शरीर की स्वाभाविक ऊर्जा से किया जाता है। इस चिकित्सा पद्धति का अद्वितीय तरीके से काम करने का तरीका है जिसमें नुकसान के स्थान पर हीलिंग को प्रोत्साहित किया जाता है। होम्योपैथी का सिद्धांत है कि यदि एक द्रव्य किसी व्यक्ति को बीमार कर सकता है, तो उसी द्रव्य को छोटे मात्राओं में लेकर उसे ठीक किया जा सकता है।

होम्योपैथी की विशेषता यह है कि इसमें उपचार की गई दवाएं सुरक्षित, स्वाभाविक, और असरकारी होती हैं, जो कि विभिन्न वय वर्गों और रोगों के लिए सामान्य रूप से अनुकूलन किए जा सकते हैं। होम्योपैथी चिकित्सा में रोग का पूर्ण और स्थायी इलाज होने का लक्षण है, जिससे रोगी को फिर से उसकी स्वस्थता की पूर्णता मिलती है।

एक विशेष बात यह है कि होम्योपैथी चिकित्सा में दवाएं विभिन्न रोगों के लिए अनुकूलन की जाती हैं, जिससे रोग का सीधा निर्मूलन होता है और व्यक्ति पूर्ण स्वास्थ्य की दिशा में बढ़ता है। होम्योपैथी की दवाएं शरीर की सुरक्षा की प्रक्रिया को सुधारने में मदद करती हैं, जिससे रोग का सफल उपचार हो सकता है।

होम्योपैथी चिकित्सा को यहाँ तक माना जाता है कि यह हर रोग को उसकी मूल कारण से ठीक करने का प्रयास करती है, जिससे व्यक्ति को समृद्धि और समृद्धि की अद्वितीय अनुभूति होती है। होम्योपैथी चिकित्सा ने अपनी सरलता, प्रभावकारिता, और सुरक्षा के लिए विश्व भर में चमक बिखेरी है और आज भी लाखों लोगों को इसका लाभ हो रहा है।

समापकता के साथ कहा जा सकता है कि होम्योपैथी चिकित्सा ने न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य के क्षेत्र में बल्कि समुदाय के स्वास्थ्य में भी एक महत्वपूर्ण योगदान दिया है। यह चिकित्सा पद्धति निर्धारित और अनुकरणीय है और सार्वजनिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

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